Showing posts with the label UtterakhandShow all
संतोष लंगड़े को लात मारो , धक्का दो.  उस पर जोर से हंसो  By: Bhishma Kukreti
मुछ्यळू  अंगरू गिंडकू  –By: Bhishma Kukreti
मदन डुकलान: अंतरराष्ट्रीय स्तर के गढ़वाली कवि By: Bhishma Kukreti
चिन्मय सायर : दर्शन और कोमलता के कवि By: Bhishma Kukreti
डॉ. प्रीतम अपाछ्याण  : सतसई शैली को पुनर्जीवित करने वाले कवि (700 दोहे) BY Bhishma Kukreti
मदन डुकलन: एक जोशीला, बहुमुखी फिल्म, थिएटर और साहित्य कार्यकर्ता By: Bhishma Kukreti
ब्वे -बाब ब्यटा तैं अर ब्यटा बुबा तैं मरणो छोड़ गेन !  (इतिहास सम्मत , करुण रस वळ, समय दर्शांद कथा ) By Bhishma Kukreti