भवन संख्या -758
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वाणगांव ( देवाल , चमोली गढ़वाल ) के रणजीत सिंह भवन में काष्ठ कला अलंकरण,
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Traditional House Wood Carving Art from Vanganv , Deval , Chamoli
चमोली गढ़वाल, के भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन,
उत्तराखंड के भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन, संख्या - 758
( काष्ठ कला पर केंद्रित )
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संकलन - भीष्म कुकरेती
- गाँव, ब्लॉक , जनपद -
स्वामित्व -रणजीत सिंह
भवन का प्रकार अर्थात पुर (Floor) व खंड - दुपुर , दुखंड
भवन में काष्ठ कला समीक्षा हेतु मुख्य अंग - खोली
भित्ति चित्र
खोली चर्चा
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ युग्म में हैं। बाहर वाला युग्म का स्तम्भ लगभग सपाट ज्यामितीय कटान की हैं।
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट/घुंडी नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट/घुंडी निर्मित हुआ है। यहाँ से दोनों आंतरिक स्तम्भ चोटी /लड़ी नुमा आकृति व सपाटी आकृति ले लेती है व यही आकृति ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड के शीर्ष की परते बन जाती हैं।
खोली के तोरणम की कला - टॉर्न नहीं निर्मित है।
खोली के छपरिका में काष्ठ कला या अन्य कला - छपरिका में दास या कड़ी कैसे हैं -सपाट
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मुरिन्ड /मथिण्ड शीर्ष में देव मूर्ति विवरण - देवमूर्ति है किन्तु छायाचित्र में अस्पष्ट
भित्ति चित्र
रणजीत सिंह भवन का आकर्षण केवल खोली ही नहीं अपितुकक्षों व मोरियों के दरवाजों के बाह्य सिंगाड़ के किनारे कलायुक्त पत्थर /मृदा की आकृति ; आलों के बाहर भित्ति चित्र हैं।
प्रथम तल में पुष्प के दो भित्ति चित्र आकर्षक हैं
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विशेष विशेषता/Exclusivity - खोली की काष्ठ कला व भित्ति चित्र
निष्कर्ष- प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण
सूचना व फोटो आभार : संजय चौहान
प्रस्तुत विवरण केवल काष्ठ कला हेतु है इसमें स्वामित्व का कोई महत्व न्यायिक स्वामित्व हेतु नहीं है। सूचनाएं श्रुति माध्यम से मिली हैं अतः स्वामित्व में अंतर् हो सकता है
Copyright @ Bhishma Kukreti , 2024PUBLICED BY
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वाणगांव ( देवाल , चमोली गढ़वाल ) के रणजीत सिंह भवन में काष्ठ कला अलंकरण,
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Traditional House Wood Carving Art from Vanganv , Deval , Chamoli
चमोली गढ़वाल, के भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन,
उत्तराखंड के भवन (तिबारी, निमदारी,जंगलादार मकान, बाखली,खोली) में पारम्परिक गढ़वाली शैली की काष्ठ कला अलंकरण, उत्कीर्णन अंकन, संख्या - 758
( काष्ठ कला पर केंद्रित )
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संकलन - भीष्म कुकरेती
- गाँव, ब्लॉक , जनपद -
स्वामित्व -रणजीत सिंह
भवन का प्रकार अर्थात पुर (Floor) व खंड - दुपुर , दुखंड
भवन में काष्ठ कला समीक्षा हेतु मुख्य अंग - खोली
भित्ति चित्र
खोली चर्चा
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ युग्म में हैं। बाहर वाला युग्म का स्तम्भ लगभग सपाट ज्यामितीय कटान की हैं।
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट/घुंडी नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट/घुंडी निर्मित हुआ है। यहाँ से दोनों आंतरिक स्तम्भ चोटी /लड़ी नुमा आकृति व सपाटी आकृति ले लेती है व यही आकृति ऊपर मुरिन्ड /मथिण्ड के शीर्ष की परते बन जाती हैं।
खोली के तोरणम की कला - टॉर्न नहीं निर्मित है।
खोली के छपरिका में काष्ठ कला या अन्य कला - छपरिका में दास या कड़ी कैसे हैं -सपाट
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मुरिन्ड /मथिण्ड शीर्ष में देव मूर्ति विवरण - देवमूर्ति है किन्तु छायाचित्र में अस्पष्ट
भित्ति चित्र
रणजीत सिंह भवन का आकर्षण केवल खोली ही नहीं अपितुकक्षों व मोरियों के दरवाजों के बाह्य सिंगाड़ के किनारे कलायुक्त पत्थर /मृदा की आकृति ; आलों के बाहर भित्ति चित्र हैं।
प्रथम तल में पुष्प के दो भित्ति चित्र आकर्षक हैं
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विशेष विशेषता/Exclusivity - खोली की काष्ठ कला व भित्ति चित्र
निष्कर्ष- प्राकृतिक , ज्यामितीय व मानवीय अलंकरण
सूचना व फोटो आभार : संजय चौहान
प्रस्तुत विवरण केवल काष्ठ कला हेतु है इसमें स्वामित्व का कोई महत्व न्यायिक स्वामित्व हेतु नहीं है। सूचनाएं श्रुति माध्यम से मिली हैं अतः स्वामित्व में अंतर् हो सकता है
Copyright @ Bhishma Kukreti , 2024PUBLICED BY
उत्तराखंड की लगूली
— with संजय चौहान.

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