जसपुरम शिल्पकारों द्वारा भूमि अधिकार आंदोलन

( सत्य घंटनाओं पर आधारित )
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कथा - भीष्म कुकरेती

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स्वतंत्रता आंदोलन समय स्वतंत्रता आंदोलन न भौत सा अन्य सामाजिक चेतना आंदोलन की बि शुरुवात ह्वेन जन आर्यसमाज आंदोलन , हरिजन , दलित क स्थान पर शिल्पकार ब्वालो आंदोलन , डवाला -पालकी आंदोलन , बामणु द्वारा खुले आम हौळ लगाणो संस्कृति उपजण , बेटी रुप्या नि खाण चेतना आदि।
हमर गाँव जसपुर (द्वारीखाल ब्लॉक, पौड़ी ) म शिलकपकारों द्वारा जंद्यो धारण आंदोलन अर डोला -पालकी आंदोलन तो प्रसिद्द ही छन और यूं आंदोलन म चौंदकोट का स्वर्गीय गंगा राम आर्य क बड़ो योगदान च।
शिल्पकारों द्वारा एक हैंक लघु आंदोलन बि चल छौ जैकि चर्चा नि हूंदी .
ब्रिटिश शासन आणो उपरान्त परिस्थिति देखि ब्रिटिश अधिकार्युं न निर्णय ले कि उत्तराखंड की आर्थिक स्तिति सुधारण तो कृषि वृद्धि आवश्यक च। तो कृषि वृद्धि हेतु रिफॉर्म आवश्यक छौ। रिफॉर्म क अंतर्गत ब्रिटिश अधिकार्युं न जबजल खुदाई कोरी खेत निर्माण की स्वतंत्रता लोगों तै दे दे छे। अर अमिन पटवारी द्वारा भूमि तै भूमि रजिस्टर म रिकॉर्ड ह्वे जांद छे। अर वन पशु मारण पर पारितोषिक दीण। संभवतया 60 प्रतिशत आज की कृषि भूमि ब्रिटिश राज म ही वनभूमि तै खोणि क निर्मित ह्वे होली।
जसपुर म जनसंख्या अनुपात म सदा ही आधा बामण अर आधा शिल्पकार राई। जसपुर को शिल्प केवल ढांगू तक ही सीमित नि छौ अपितु श्रीनगर व टिहरी तक बि प्रसिद्ध छौ। जख बामण अपर अपर शिल्पकार श्रमिकों से वन भूमि तै कृषि भूमि म परिवर्तन करवाणा रैन किन्तु एक मीटर भूमि भि शिल्पकारों तै खणनो अधिकार नि मील। बिचारा शिल्पकार दुसरों बान भूमि खणदा रैन किन्तु सामाजिक नियम व राजकीय उपेक्षा क कारण शिल्पकारों म या शक्ति कबि नि आयी कि वो वन भूमि खोदी क अपर वास्ता कृषि भूमि त्यार कौर साकन।
स्वतन्त्रता आंदोलन समय , जंद्यो आंदोलन समय शिल्पकारों म चेतना आण शुरू ह्वे कि शिल्पकारों का भी भौत सा मानवीय अधिकार छन। शिल्पकारों म कुछ युवा अपर अधिकारों प्रति सचेत ह्वे गेन जौं मधे स्वर्गीय गैणु राम बिंडी कार्यशील छा। गैणु राम प्रसिद्द हुक्का निर्माता छा तौंक हुक्का दुगड्डा शीला तक प्रसिद्ध छ। एक दिन जसपुर का बिट्ठंन द्याख कि गाँव क एक डांड नाव क पाणी निकट कुछ लोग कुछ करणा छन , नाव क पाणि निकट क भूमि वन क्षेत्र की छे अर जब लयड़ -पुर्यत गोठ हूंद छे तो गौर पाणी खाणा नावक पाणी म आंदा छा। बिट्ठ (कुकरेती , जखमोला , बहुगुणा , नेगी ) लगों न पता लगाई तो पायी कि गैणु -मूर्ति -हिरदै क परिवार नावक डांड खौणि कृषि भूमि बणाना छन। या बात सूणी रघुबर दत्त कुकरेती पर नर्सिंग चढ़ गे , ज्वालाराम सौकार पर क्रोध की ज्वाआ फुट गेन , माधवा नंद बहुगुणा अर बलख कुकरेती क आँखों से ज्वाला फुटण लग़ गेन। युवा डुन्कर सिंग गरम तवा म सि नचण लग गेन। स्वनामित ग्राम प्रधान युवा घना नंद कुकरेती अर घनश्याम कुकरेती भी क्रोध म जळण लग गेन। तौं तै वन भूमि जाण म दुख नि छौ अपितु क्रोध छौ कि शिल्पकार कन भूमि अधिकार बण सकदन ? सैकड़ों वर्ष तक यी ह्वे कि शिल्पकार खेती भूमि खोदन किन्तु भूमि अधिकार केवल बिट्ठों तै ही मिल्दो छौ।
गांवक मथि छ्वाड़ बिट्ठ रौंदा छा तौळ शिल्पकार। घन्ना प्रधान न शिल्पकारों क नेताओं तै मथि भट्याी अर खुले आम निर्णय सुणाइ - यदि गैणु वण भूमि खुदाई नि रुकद तो शिल्पकारों क बिट्ठ क्षेत्र से आण जाण बंद , कै बि शिल्पकार की सहयता नि करे जाली। इख तलक कि शिल्पकारों क पाणी भरण बि बंद करे जाल। तौं तै तमाखू आलण सब बंद ह्वे जालो।
तब शिल्पकारों को सावर्जनिक स्थल जन बाटो -पाणी पर अधिकार बि बिट्ठ ही संचालित करदा छा।
शिल्पकार डर गेन अर अपर प्रतिनिधि नावक डांड भेजिक तौन निइच्छा म बि गैणु क भूमि खुदवाई रुकवाइ। गैणु सपरिवार लज्जित सा घर ऐ गे। क्रोध , लज्जित छौ किँतु वो हार्युंं नि छौ। शिल्पकारों म अधिकार क हेतु गैणु सदा ततपर रौण वळ मनिख कुछ देर चुप रै सकद , सदा हेतु ना।
आठ दस दिन शान्ति राई। कि ग्वील पधान से सूचना मील कि लाट साब क टूर लगणु च तो जसपुर वळों तै इथगा दिन बेगार हेतु /निशुल्क श्रमिक सेवा हेतु लाट साब की सेवा म आण पोड़ल। तब तलक बेगार आंदोलन शुरू नि ह्वे छा।
अलिखित नियम अनुसार बेगार हेतु बिट्ठ अन्य सामग्री क कुलीगिरी करदा छा अर ट्वाइलेट चुल्ह (कंडोम ) तै शिल्पकार उठांदा छा। ऐवज म तै शिल्पकार तै बिट्ठ चार पांच ढिंढी तामाखू दे दींद छा। सब कुछ अलिखित नियम पर सुचारु रूप से चलदा छा।
पर अबकी जनि बेगार की सूचना ग्वील पधान से आयी कि कुछ समय उपरान्त शिल्पकारों प्रतिनिधि ग्राम प्रधान घना नंद कुकरेती म आयी अर अंतीमेथम दे क चल गे - हम शिल्पकार लाट साब क गूवक चुल्ह तबि उठौला जब गैणु तै नावक डांड म खेती वास्ता भूमि खुदणो स्वीकृति मीलली।
बिट्ठुंन पंचैत बिठाई किन्तु गुवक चुल्ल उठाण कैक बि बसक बात नि छे। अतः गैणु क परिवार तै नावक डांड म केवल एक माण वन भूमि खुदणो स्वीकृति दिए गे।
या एक शिल्पकार क्रान्ति छे। कुछ वर्ष उपरान्त एक हैंक शिल्पकार मवासन चम्बा पाणी क निकट भूमि खत्याई अर आश्चर्य या च कि तै पाणी तै अपर नाम ग्वील पधान से बि लिखवाई अर जसपुर क बिट्ठों तै पता बि नि चौल।
जसपुर का बिट्ठुं अवस्था इन ह्वे गे जन यूं तै कैन मुसलमान बणै दे हो अर भैस खलाई दे हो। बिट्ठ ह्वेक गूवक चुल्ल उठाण !

या एक छुटि क्रान्ति छे किन्तु शिल्पकार समाज अनुसार तब एक बड़ी क्रान्ति छे कि कै शिल्पकार म पाणी निकट इथगा भूमि हो।


स्वर्गीय श्रीमती क्वांरा देवी पत्नी स्व शीशराम कुकरेती द्वारा सुणाइ कथा पर आधारित
कथा पात्र , स्थान , समय काल्पनिक।

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2024

लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
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