भवन संख्या - 751
-
हर की दून ( उत्तरकाशी ) में तीन भवनों की काष्ठ कला, अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन
-
Traditional House wood Carving Art in ,Har ki Doon Uttarkashi
उत्तराखंड के भवन (तिबारी, निमदारी , जंगलादार मकान , , खोली , कोटि बनाल ) में पारम्पपरिक गढवाली शैली की काष्ठ कला, अलकंरण, अंकन उत्कीर्णन -751
संकलन - भीष्म कुकरेती

-
प्रस्तुत छाया चित्र में तीन भवन दृष्टिगोचर हो रहे हैं। एक भवन विशाल व अतिआकर्षक है व शेष गौण। सबसे ऊपर व अति आकर्षक भवनों की काश्त कला पर चर्चा होगी
गाँव, ब्लॉक , जनपद - हर की दून , उत्तरकाशी
भवन संख्या - १ (जंगले वाला )
भवन का प्रकार अर्थात पुर (Floor) व खंड - दुपुर या तिपुर (स्पष्ट नहीं )
भवन में काष्ठ कला समीक्षा हेतु मुख्य अंग -जंगले के सिंगाड़ /खाम /स्तम्भ
- जंगले की जानकारी -
जंगला का तल /floor - प्रथम या द्वितीय
छज्जा प्रकार (काष्ठ या पाषाण) -काष्ठ
जंगले में स्तम्भों की संख्या -पांच से अधिक
सभी स्तम्भ स्पॉट ज्यामितीय कटान के हैं
जंगले के आधार पर क्या उप जंगला/ रेलिंग है ? यदि हाँ तो वर्णन - उप जंगल है सपाट स्तम्भों का
प्रस्तुत भवन काष्ठ कला दृष्टि से महत्वपूर्ण न हो किन्तु सर्वेक्षण में शैली हेतु महत्वपूर्ण है जो हिमपातीय क्षेत्रों के भवनों का प्रतिनिधित्व करता है।
मध्य के भवन में भी जंगला जैसी संरचना है व स्तम्भ सपाट लगते हैं।
आकर्षक भवन की काष्ठ कला विवरण
भवन प्रकार - ढाई पुर
भवन भाग जिनके काष्ठ कला का विवरण है - खोली या भूतल के द्वार व उनके शीर्ष , प्रथम तल पर जंलगा या हॉल के स्तम्भ व बुर्ज
खोली
भवन के भूतल में तीन कक्ष हैं जिनके द्वार आकर्षक हैं इन द्वारों

जंगला - किस तल floor पर है - प्रथम तल , तीन दिशाओं में है हॉल जिसके भाहर जंगला बंधा है।
स्तम्भ (सिंगाड़ ) संख्या -15 से अधिक
स्तम्भ कला - आधार पर घुंडियां निर्मित हैं जैसे साधारण गढ़वाली शैली में प्रचलित हैं। ऊपरी भाग में उसी तरह की घुंडियां हैं। यहां से स्तम्भ सपाट थांत आकर लेता है व यहीं से अर्धमंडल /तोरणम भी शुरू होते हैं। तोरणम की कटान अस्पष्ट हैं।
जंगले में ढकाव
निम्न आधार पर एक फिट तक स्तम्भ के मध्य तख्तों /पट्टियों से ढका गया है। स्पॉट तख्ते हैं।
लघु बुर्ज
भवन में एकलघु बुर्ज /बालकोनी बाहर की ओर है जिसमे स्तम्भ /तोरणम वैसे ही हैं जैसे मुख्य भवन की हैं।
विशेष विशेषता यदि हो - भवन अपने आप में विशेष है व प्राचीन उत्तरकाशी की भवन काष्ठ कला का द्योत्तक है जिस पर गढ़वालियों को गर्व है।
निष्कर्ष- भवन में ज्यामितीय कटान अलंकरण अधिक व स्तम्भ घुंडियों में संभवतया कमल दल अंकित हुयी होंगी।
सूचना व फोटो आभार : भूपेंद्र रावत

यह लेख भवन कला संबंधित है न कि स्वामित्व हेतु . भौगोलिक , स्वामित्व विवरण श्रुति से मिलती है अत: अंतर हो सकता है जिसके लिए सूचना दाता व संकलन कर्ता उत्तरदायी नही हैं .



Copyright @ Bhishma Kukreti, 2024
PUBLICED BY 

उत्तराखंड की लगूली