भवन संख्या - 775

-
गुंजी ( धारचूला , पिथौरागढ़ ) के भवन संख्या 2 में काष्ठ कला, अलंकरण , उत्कीर्ण
Traditional House Wood Carving Art of Gunji , Dharchula Pithoragarh , Kumaun
उत्तराखंड के भवनों (बाखली , जंगला , छाजों , खोली ) में काष्ठ कला, अलंकरण , उत्कीर्ण - 775
-
संकलन - भीष्म कुकरेती
-
गाँव , ब्लॉक , जनपद -गुंजी , धारचूला , पिथौरागढ़
भवन प्रकार - तिपुर , बहुखण्ड
भवन में काष्ठ कला हेतु मुख्य अंग - दो खोली , तीन धरण /बौली /शहतीर , सात युग्म के छाज
शहतीर /धरन या बौळी (दान के ऊपर की चौड़ी कड़ी ) में काष्ठ कला - सभी धरण ( दान के ऊपर की बड़ी कड़ी ) या बौली
खोली -संख्या १ सामने से फोटो में दायीं ओर
खोली के स्तम्भ कला -
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ सपाट आकार लेता है व ऊपर खोली के शीर्ष /मुरिन्ड /मथिण्ड की परत बन जाते हैं।
खोली में तोरणम की कला - उत्कीर्णन है किन्तु चित्र में अब स्पष्ट दीखते नहीं। अनुमान है स्कंध में सूरजमुखी फूल चित्र हैं
खोली शीर्ष में काष्ठ कला - शीर्ष की परतें सपाट जो स्तम्भ के भाग हैं। शीर्ष में देव मूर्ति के लक्षण हैं।
खोली ऊपर छपरिका या छत के आधार में यदि काष्ठ कला विद्यमान है - छपरिका व खोली शीर्ष के मध्य एक आयात में हस्ती सूंड कुछ देव चित्र उकेरे गए हैं
खोली -संख्या 2 , छायाचित्र
खोली के स्तम्भ कला - स्तम्भ युग्म में विद्यमान हैं
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ सपाट हो ऊपर शीर्ष की परतें बनते हैं।
खोली में तोरणम की कला - इस खोली में कोई तोरणम नहीं है
खोली शीर्ष में काष्ठ कला - सपाट कड़ियाँ हैं
खोली ऊपर छपरिका या छत के आधार में यदि काष्ठ कला विद्यमान है - शीर्ष व छपरिका मध्य आयत है जिसमें हाथी सूंड (गणपति प्रतीक ) व अन्य मानवीय अलंकृत अंकन
छाज संख्या - प्रथम तल पर तीन वा दूसरे तल में
छाज के स्तम्भों में काष्ठ कला - सभी छाजों के स्तम्भ युग्म में हैं व स्तम्भ कला लगभग एक सामान है।
छाजों के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ ऊपर बढ़ता है व उपरोक्त आकृती की पुनरावृति होती है व ऊपरी कमल दल से स्तम्भ सपाट ऊपर जा शीर्ष बनते हैं व यहीं से तोरणम भी उभरता है
छाज के तोरणम की काष्ठ कला - सभी छाजों में अंकन अस्पष्ट
छाजों में कई प्रकार के ढक्क्न हैं कुछ आधे , कुछ पूरे ढके हैं। सभी ढक्क्न आकर्षक कलाकृतियां अंकित हुयी हैं एक भी ढक्कन कला में समान नहीं हैं। अंकन महीन हुए हैं।
विशेषता - छज्जों की कला विशेष हैं व ढक्क्नों का अंकन विशेष व आकर्षक हैं।
निष्कर्ष ---
सूचना व फोटो आभार : अमित शाह फोटोग्राफी संग्रह
प्रस्तुत आलेख काष्ठ कला पर केंद्रित है ना कि स्वामित्व पर। स्वामित्व या भागीदारों के नाम में अंतर् हो सकता है।
Copyright@ Bhishma Kukreti , 2024

लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2024