अर मंदबुद्धि राजा न सूचनादाता तै फांसी दे दे
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चखन्यौर्या कथा - भीष्म कुकरेती
-संतान
एक जंगळ छौ तैक नाम बड़ जंगळ छौ। एक समय बड़ जंगळ म महाराजा शेरसिंह की मृत्यु ह्वे। शेर सिंह क क्वी संतान नि छे। बड़ जंगळ क नियम अनुसार महाराजा क मृत्यु उपरान्त दसवां दिन म सब सभासद राजा क चुनाव कार्ल। चूँकि वो शेर सिंह क परिवार से नि होलु तो तै तैं महाराजा ना अपितु राजा की पदवी मीलली।
एक प्रभावशाली उन्नादेसी स्याळणी क पुत्र छौ नाम छौ मंदबुद्धि। स्याळणी क मैत मित्रों न बड़-जंगळ म पक्ष जुटाव (लॉबिंग ) कार अर दसवां दिन सभासदों न मंदबुद्धि स्याळ तैं राजा घोसित कर दे।
मंदबुद्धि क शिक्षा दीक्षा बड़ -जंगळ से भैर हुईं छे तो वैक मूल मित्र बि उन्नादेसी (विदेशी ) छा अर अब राज मिलण पर बि वैक मंत्रणा परामर्शदाता बि उन्नादेसी सिद्धांतों से प्रभावित लोग छा जौं तै बड़ जंगळ क प्रजा क सोच -विचार क बारा म कतई बि ज्ञान इ नि छौ।उल्टां सी विदेशी सोच का बड़ -जंगळ की सभ्यता व संस्कृति की हंसी उडांदा छा। मंदबुद्धि राजा विदेशी विचारधारा वळ परामर्शदाता कु अनुसार राज करण लग गे। मंदबुद्धि तो पैलि से छौ तो राज कन चलण छौ यु पाठक कल्पना कर सकदन।
बड़जंगळ म एक नियम छौ कि प्रतिवर्ष सभा म बड़जंगळ म घुमण वळ गुप्तचर देस की वास्तविकता बतांदा छा। जै से कि राजा प्रजा मूलक निर्णय ले ल्यावो।
वैदिन सभा भरीं छे , मंदबुद्धि आसन म बैठ्युं छौ। तैक विदेशी सोच का परामर्श दाता मथि बैठ्यां छा व जु महाराज शेर सिंह क समय क बड़ जंगळ क सभ्यता, संस्कृति , समाज , दर्शन का वास्तविकता क ज्ञाता छा सि तौळ दूर नेपथ्य म उपेक्षित बैठ्यां छा। विदेशी सोच का परामर्शदाता बहुमूल्य सूखा फल व मेवा चबाणा छा व गुलाब जल पीणा छा तो शुद्ध बड़ जंगळ हितैषी कूण्या म चणा बुकाणा छा अर घळतण्या पाणी पीणा छा।
उचित समय पर गुप्तचर न मंदबुद्धि क औपचारिक आदेश अनुसार देस की दशा बताण शुरू कार -
गुप्तचर न ब्वाल - हे राजन देस क कूण्या -कुण्या म प्रशासक प्रजा क नि सुणदन छुटि से छुटि सिकाइत पर प्रजा से घूस खंडन अर छुट -छुट से कार्य करण पर निर्लज्ज ह्वैक न्यौछावर मंगदन।
राजन ! जौं राजकीय कर्मचार्युं कार्य प्रजा की पीड़ा राजधानी म उच्च प्रशासन तक पंहुचाणो क च सि स्थानीय प्रशासकों से घूस खाई लीन्दन अर प्रजा पीड़ा राजधानी तक पौंचदि इ नी।
राजा क एक विशेष परामर्शदाता न पूछ - देस म फल फूल उत्पादन व प्रजा तै भोजन को क्या प्रबंध च।
हे राजन फल फूल तो भौत उत्पादन हूंद किन्तु फल -फूल विक्रेता काल्पनिक उपज हीनता क नाम पर प्रजा से भौत बिंडी मूल्य लींदी।
तौळ उपेक्षित महाराज क समय क सभासद न पूछ - तो स्थानीय प्रशासक फल फूल विक्रेताओं पर कार्यवाही नि करदन ?
गुप्तचर क उत्तर छौ - स्थानीय प्रशासन का अधिकारी फल -फूल विक्रेताओं से न्यौछावर खांदन अर इख उच्च पद पर बैठ्यां अधिकारिओं तक न्यौछावर पंहुचांदन।
मंद बुद्धि राजा क एक परामर्श दाता न गुप्तचर की बात काटद पूछ - मूल्य अधिक च किन्तु उपज तो प्रजा तै मिलणी च कि ना ?
गुप्तचर समज गे कि राजा क विशेष भद्र पुरुष बात रूकवाणु च तो तत्पर गुप्तचर न बोल दे - उपज तो भरपूर हूंद।
मंदबुद्धि स्याळ राजा तै आवश्यक प्रश्न व उत्तरों से ऊब पैदा हूणी छे। वैक परामर्शदाताओं क सलाह छे कि तुम चुप रैन हम सब संबाळ ल्योला। किन्तु मंदबुद्धि स्याळ बिंडी समय तक ऊब तैं सहन नि कार साको। मंदबुद्धि स्याळ राजा न पूछ - मेरी छवि प्रजा म कन च ?
पूरी सभा म नीरवता , स्तब्धता छै गे . कैक समज म नि आयी कि गुप्तचर क्या उत्तर देलो। मंदबुद्धि स्याळ राजा क अति विशेष परामर्शदाता न मध्य म ब्वाल - राजन यी प्रश्न सबसे अंत म।
मंदबुद्धि स्याळ राजा क्रोधित ह्वे गे अर गुप्तचर तै आदेश दे - मेरी छवि देस व प्रजा व विदेश म कन च सब सत्य बता।
गुप्तचर न डरद डरद उत्तर दे - राजन प्रजा व हमर देस म तुम्हारी छवि एक बिगड़ैल मंदबुद्धि राजकुमार की च जो मंदबुद्धि ही ना अति मूर्ख बि च अर जैकी अपर क्वी सोच /विचारधारा नी। प्रजा म आम धारणा च कि मंदबुद्धि राजा तै परामर्शदाता चुनणो बि सओर नी। परामर्शदाता मंदबुद्धि राजा क मूर्खता का लाभ अपर लाभ हेतु करणा छन। प्रजा क मन अनुसार तुमर परामर्शदाताओं तै बड़ जंगळ क वास्तविकता क बारा म ही नी पता। जो जणगर छा तौं तै मूर्ख राजा न सभासद समिति से भैर कर दे।
मंदबुद्धि न क्रोध म पूछ - अर विदेश म मेरी छवि। सत्य बोल निथर ....
गुप्तचर न ब्वाल - राजन विदेश म प्रचारित च कि बड़जंगळ को राजा मूर्ख च तो तैक परामर्शदाताओं तै पटैक बड़ जंगळ पर अपरोक्ष अधिकार करे जाय।
इथगा म ात विशेष परामर्श दाता न राजा से ब्वाल - राजन ये गुप्तचर न तुम्हारी व राज्य की बड़ो अपमान कर दे ये तै तुरंत मृत्यु दंड दिए जाय।
तुरंत शीघ्रताशीघ्र पाश (फांसी ) क प्रबंध ह्वे अर गुप्तचर तै फांसी चढ़येगे अर्थात सूचनादाता की हत्त्या करे गे।
दुसर वर्ष बि गुप्तचर न वै सूचना दे अर मंदबुद्धि राजा क परामर्शदाताओं क परामर्श से गुप्तचर तैं पाश (फांसी ) चढ़ये गे।
तिसर वर्ष बि तिसर गुप्तचर तै पाश चढ़ये गे।
चौथ वर्ष सब गुप्तचर नौकरी छोड़ी दुसर देस चल गेन अर चौथ वर्ष क्वी बि सूचना दीण वळ नि छौ तो मंदबुद्धि राजा अर विदेशी विचारधारा क परामर्शदाता प्रसन्न ह्वेन कि राज्य म अब क्वी समस्या नी।
प्रजा म बेचैनी फैलणी छे तो प्रजा न एक बाघ तै तैयार कार अर बाघन रातों रात क्रान्ति कौरि अर बड़जंगळ क राज अपर हथों म ले ले।
लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो
सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
Copyright @ Bhishma Kukreti, 2024
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