ह्यां यु त्रिपाठी खारी बिन, चाय किलै नि पींदु ?
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कथा- भीष्म कुकरेती
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मीन अपर जीवन क महत्वपूर्ण द्वीयक वर्ष फिल्म लाइन म बर्बाद करिन। फिल्म लाइन क चस्का शराब व सल्फा से बि भयंकर हूंद। सरा फिल्म संसार निराकार संसार च। आप दुसर उद्यम म ह्वावो तो बिजनेस से भैर आणो वास्ता अपर ऐसेट बेच लींदा। किन्तु फिल्म लाइन म फिल्म इन ऐसेट च जैक मूल्य शून्य च यदि फिल्म हिट नी। प्रत्येक फिल्म लाइन म भाग्य चमकाण को आकांक्षी रात म सितारा बणनो सुपिन दिखुद।
फिल्म लाइन वळों कृत पर सामान्य लोग हंसदन किन्तु वो भी अपर मन अनुसार एकदम सही हूंदन। हम ऊंकी व्यथा , ढब क मजाक उड़ांदा।
मि अपर मित्र मनमोहन जखमोला जु एक कम बजट फिल्म निर्माण करणु छौ क दगड़ जुड़ गे छौ। तो मनमोहन क ओफिस रेगुलर जाणु रौंद छौ अर मनमोहन क फिल्म स्टाफ क महत्वपूर्ण अंग बण गे छौ। मनमोहन क मि लखनपाल म बॉस छौ तो मनमोहन रिस्तेदारी व बॉस क अनुसार पुरो आदर दींद छौ तो स्वयमेव ही फिल्म क अन्य स्टाफ बि मि तै आदर दींद छा। फिल्म क डाइरेक्टर भट्टाचारजी (भट्टाचार्य जी ) क दगड़ मेरी खूब बणदि छे अर मेरी द्वी गढ़वाली कथाओं पर भट्टाचारजी न कॉमर्सियल फिल्म स्क्रिप्ट बि लेख जो साहित्य क मापदंड पर फिसड्डी छे किन्तु कॉमर्सियल फिल्म अनुसार ठीक छे तब।
चूँकि फिल्म को प्रोड्यूसर नया , निर्देशक भट्टाचार्जी नया तो कलाकार अधिकतर नया ही। फिल्म म पुलिस इंस्पेक्टर क रोल हेतु एक बिहार प्रवासी अमिताभ त्रिपाठी क चुनाव ह्वे गे छौ। त्रिपाठी जी पटना क छन। मां -पिताजी द्वी डाक्टर छ्या, मां बाप को एकमात्र संतान। तो इख मुंबई म स्ट्रगल सरल ह्वे गे छौ कि घर से प्रत्येक मैना मणि ऑर्डर समय पर ऐ जांद छौ। त्रिपाठी जी यद्यपि स्ट्रगलर छा किंतु लक्षण एक बड़ स्टार का ही विकसित ह्वे गे छा जनकि देर से बिजण , देर से फिल्म शूटिंग म पंहुचण। त्रिपाठी जी ओफिस तो समय पर अर्थात दस ग्यारा बजे पौंछ जांद छा (कुछ ऑवर कार्य नई छौ तो समय बिताणो ओफिस सबसे बढ़िया स्थल छौ) .
त्रिपाठी जी क एक बड़ी आश्चर्य वळ ढब छौ कि जब बि चाय दिए जाय तो तौं तै खारी (मुंबई क प्रसिद्ध बिस्किट जन ) अवश्य चयेंद छे। ओफिस म यूंन अपर पैसा से खारी डब्बा धर्यु चाउ। पर भौत सा बार फ़िल्मी लोग भूख म या उनी बि त्रिपाठी जिक खारी डब्बा खै जांद छा। अर खाली डब्बा देखि त्रिपाठी जी क क्रोध दिखण लैक हूंद छौ।
एक दिन की छ्वीं छन। फिल्म की शूटिंग चेम्बूर म स्टूडियो म छे। तैदिन त्रिपाठी जीक सीन सुधीर पांडे अर अन्नू कपूर, ऋषभ शुक्ल क संग छे। बस यी तीन ही स्टार छा फिल्म म शेष नया ही। सीन म यि सब हूण चयेणा छा कि स्पॉट बॉय चाय क केतली अर गिलासडी ल्हैक ऐ गे। ढब अनुसार त्रिपाठी न खारी की मांग कर दे।
स्पॉट बॉय न उत्तर दे - साब खारी तो सुबेर तुमर बाद भौतुं न खारी क मांग कार अर सब समाप्त ह्वे गे।
त्रिपाठी न ब्वाल- त ब्यटा न्याड़ क दुकान से लह्या।
स्पॉट बॉय न उत्तर दे खारी इखम ना भौत दूर ही मिल सकद।
यि सुणन छौ कि त्रिपाठी क्रोधित ह्वे गेन , क्रोधित क्या अगबिताळे गेन। अर जोर जोर से बुलण लग गेन - इथगा असम्मान! .... भौत बड़ बड़ करण लग गेन। डाय्र्क्टर भट्टाचारजी त्रिपाठी से क्रोधित ह्वे गेन अर ऊंन बोल दे - हूं ऐक्टिंग तो गधों की अर एटीच्यूड अमिताभ बच्चन को ?
त्रिपाठी हौर बि क्रोधित ह्वे गे। बात अग्वाडी बढ़द कि सुधीर पांडे जी मनमोहन , भट्टाचार्जी अर मैं तै अलग भीतर क रूम म ल्ही गेन।
सुधीर पांडे जी न बोलि - भट्टाचारजी ! द्वी तीन दै मि रात दारु पार्टी म त्रिपाठी जीक दगड़ बैठ छौ तो त्रिपाठी जी से पता चल कि मुंबई आण पर ऊं तै पता चल कि लीजेंड्री दिलीप कुमार चाय बगैर खारी क नि पींदन। तो तब से त्रिपाठी जीन ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार जीक ऐक्टिंग से कुछ नि सीख किन्तु दिलीप कुमार जन बणनो खातिर त्रिपाठी जीन खारी क ढब पाळी दे।
अब सब समझ गेवां कि त्रिपाठी जी बि स्ट्रगलर साइकोलॉजी क शिकार छन कि लीजेंड बणनो खातिर लीजेंड क एक लक्षण अपनायी लीन्दन।

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती , जनवरी 2009
लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
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