Bhishma Kukreti, Saroj Sharma और 
27 अन्य लोगों
 के साथ हैं.

जब इंदिरा जी क बान हमन बोगस वोटिंग कार
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कथा - भीष्म कुकरेती
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मि तब देहरादून म संभवतया ग्यारा म पड़द छौ जब इंदिरा जीन पिरवी पर्स समाप्त करी छौ अर बैंको राष्ट्रीयकरण करि छौ। अर में सरीखा टीन एजेर्स इंदिरा जी क मानसिक गुलाम बण गेवां। हॉस्टल म जब बि राजनैतिक छ्वीं लगद छे तो हम विद्यार्थी भारत से गरीबी हट जाली ना गरीबी हट गे क सुपिनों छ्वीं लगांद छा। वास्तव म हम अधिकांश गढ़वाली छात्रों तै गरीबी हटणो अर्थ छौ बल ठाट की सरकारी नौकरी अर आज क तुलना म दुगण वेतन -भत्ता। तब हमकुण गरीबी हटणो क ेकी अर्थ आंद छौ सरकारी नौकरी। बैंकों राष्ट्रीयकरण का अर्थ हम छात्रों इन लगाई जन अब बैंको क धन अबि गरीबों तै दिए जाली। गरीबी हटाओ नारा घर घर म चर्चित हूंद छौ।
तब समाचार पत्रों म पत्रकार , लेखक, विचारक व्यंग्यकार सब प्राइवेट उद्यम जन टाटा, बिरला आदि , प्राइवेट स्कूल /कॉलेजों जन सेंत थॉमस या डीएवी जन संस्थाओं पर भद्दा मजाक उदांद छा। यूं इंदिरावादी विचारकों लेख बाँची बाँची हम छात्र बि प्रभावित छा कि भारत म गरीबी की जड़ प्राइवेट व्यापारिक संस्थान व प्राइवेट शिक्षण संस्थान छन। हम सब इंदिरा समर्थकों तै इन लगद छौ कि भारत म सरकारी नोकर्युं कमी टाटा , बिरला बाटा कम्पन्यु कारण च।
इंदिरावादी लेखकों क इथगा प्रभाव पोड़ कि हम भौत सा विद्यार्थी पल्टन बजार का प्रत्येक दुकानदार तैं भारत का सबसे बड़ शत्रु समझण लग गे छा। हम महंत इंदिरेश दास द्वारा स्थापित कॉलेज म बिन फीस का पढ़दा छा सरकारी कॉलेज स्कूल म फीस हूंदी बि रै होली किन्तु महंत जीक कॉलेज विद्यालय म ना ही समझो। फिर भी हम इंदिरावादी लेखकों से इन प्रभावित छा कि हम समझदा छा कि गुरु राम राय ट्रस्ट एक साम्राज्यवादी सामंतवादी संस्था च जो हमर शोषण करणु च। गरीबी हटाओं आंदोलन व इंदिरावादी लेखकों लेखों इथगा प्रभाव छौ कि लक्ष्मण विद्यालय व गुरुराम राय कॉलेज म सब कुछ फ्री (फीस व हॉस्टल बि फ्री ) हूणो उपरान्त बि हम गुरु राम राय ट्रस्ट तैं शोषक संस्थान समजण लग गे छा। जु हम तै प्रतिदिन चाय उधार म पिलांद छा वे चाय वळ नाम छौ मठरी जी जु हम तै उधार म चाय , बन्स अर मठरी दींदा छा। अर हम मनी ऑर्डर आणो उपरान्त इ हिसाब किताब करदा छा वै चाय वळ तै बि समाज क शोषक समजद छा। हमर मस्तिष्क म बैठ गे छौ कि सब लाला लोग समाज तै चुसणा छन, शोषण करणा छन अर यी भारत की सम्पति क बेकार म उपभोग करणा छन।
मि अर चंदन प्रतिदिन कॉलेज क पुस्तकालय म समाचार पत्र अपर सामान्य ज्ञान बढ़ाणो नि जांद छा बल्कि यी पता लगाणों बान जांद छा कि इंदिरा जी गरीबी हटाणो क्वी योजना बि लायी। प्रतिदिन निरास ही हूंदा छा कि अबि तक गरीबी नि हट किन्तु हम सरीखा इंदिरा भक्तों तै पूरो आस छौ कि एक दिन इंदिरा जी इन जादूगरी ब्वान लगाली कि एक सेकंड म गरीबी समाप्त ह्वे जाली अर्थात जनि छात्र कॉलेज या स्कूल से भैर आलो तनि नौकरी पक्की ह्वे जाली। हमन यीं आस म देहरादून इम्प्लॉयमेंट ऑफिस म नाम रजिस्टर कराई दे कि पता नी कैदिन गरीबी हट अर हम तै पढ़दा पढ़दा नौकरी मिल जाली। हमर हॉस्टल वास्तव म गरीबों क वास्ता ही छा। भौत सा विद्यार्थी हॉस्टल म ही भोजन पकान्द छा। लकड़ी क सप्लाई वास्ता निकट महंत जी क दरबार का बगीचों से या कॉलेज म रात कुर्सी चोरी कोरी क आपूर्ति हूंद छे। हॉस्टल क निकटवर्ती खेत जो पूर्वी उत्तर प्रदेश का लोग किराया देक करदा छा अर्थात सब्जी उगांदा छा तो विद्यार्थी रत्यां यूं खेतों से गोभी मूली लै जांदा छा। इन विद्यार्थ्युं कुण गरीबी हटाणो अर्थ छौ यूंक पिताजी क इथगा वेतन बढ़ जाय या आय बढ़ जाय कि यूं तै हॉस्टल म भोजन नि पकाण पोड़ अपितु होटल म भोजन खाये जाय।
हमर कॉलेज म एक असवाल जी अध्यापक छा। वेतन से परिवार पालन नि ह्वे सकद छौ तो तौन एक भैंस पाळीं छे अर श्रीमती असवाल जी प्रतिदिन घास कटणो झंडा मोहल्ला से कारगी जिना महंत जी क बगीचों म आंदि छे। श्रीमती असवाल कुण गरीबी हटणो क अर्थ छौ असवाल जी तै पूरो वेतन मिल्दो रावो जथगा पेपर म साइन करदन जां से श्रीमती असवाल तै घास कटणो नि जाण पोड़ अपितु बजार से घास खरीद लिये जाय । बड़ सुपिन ना अध्यापकों पत्नी क छुट सि सुपिन छौ कि सब अध्यापकों तै पूरो वेतन मिल जाय।
हमर गां तक बि गरीबी हटाओ क सूचना मिल गे छे हमर गौशाला क गौड़ी बि गरीबी हटाओ क आस म दूध दीणा छा कि एक दिन गौड़युं वास्ता भरपूर घास छन्नी म मिल जालो जंगळ जाणों आवश्यकता नि पड़ जाय।
धूमा बोडी कुण गरीबी हटाओ क अर्थ छौ स्वर्गीय बाडा क पेन्सन म द्वी चार रुपया वृद्धि हो जाय।
चार पांच गांवों मध्य एक ही कंट्रोल की दूकान छे। तो चिनी , मिट्टी तेल आंद इ निबट जांद छौ गाँव वळो सुपिन छूट छौ कि चिनी अर मिट्टी तेल क आवक म बिंडी ना कुछ तो वृद्धि हो जाय।
बनारसी बाडा तै द्वी तीन मैना म ऋषिकेश जाण पड़द छौ अर हर बार गाड़ि नि मिल्दी छे विशेषतर सीजन म तो तीन तीन घंटों तक बस नि मिलदी छे। देवप्रयाग -ऋषिकेश रोड पर बस स्टॉप हमर गाँव से आठ मील दूर छे। बनारसी बाडा कुण गरीबी हटणो अर्थ छौ बसों संख्या म वृद्धि। तब सुपिन दिखणम बि कंजूसी हूंदी छे। ऋषिकेश वास्ता बस संख्या क सुपिन दिखदा छा किंतु हमर गाँव म बस आण लग जावन क सुपिन दिखण बि कठिन छौ।
देहरादून म हमकुण मठरी लाला भारतवास्यूं का शोषक लगद छौ किन्तु इंदिरा कॉंग्रेस को विधायक बी बी शरण जु तीन तीन डिस्टलरी क मालिक छौ तै हम शोषित समजदा छा कारण बी बी शरण इंदिरा जी क विधायक जि छौ। हमकुण जो अमीर कॉंग्रेसी हो वो समाजवादी अर जु कॉंग्रेसी नि हो वो समाज शोषक।
तब एक दिन सूचना मील कि चुनाव जितणो उद्देश्य से प्ले ग्राउंड म रैली क वास्ता आणि छन। हम सब इंदिरा भक्त अति प्रसन्न छा कि इंदिरा जी देहरादून की कुछ गरीबी दिल्ली लीजाली। हम इंदिरा क रैली शुरू हूण से चार घंटा पैली इ प्ले ग्राउंड म पौंछ गे छा। सब अगनै बैठणो या खड़ हूणो प्रयत्न म छा गरीबी हटाओ क परी इंदिरा जी तै निकट से दिखण आवश्यक छौ। बड़ी मुश्किल से दर्शकों क तिसर छूठ पंक्ति म स्थान मिल हि गे।
इंदिरा जी ऐन। खूब जै जैकारा ह्वे। स्टेज भौत मथि छौ मचान जन। इंदिरा जी न भाषण शुरू कार। हम क्या सभी दर्शक मोहित ह्वे गेवां। इंदिरा जी म कुछ तो छौ। आठ दस मिनट उपरान्त इंदिरा जीन 'गरीबी हटाओ ' क अपर प्रण दुहरायी कि भारत से गरीबी हटण इ चयेंद अर इंदिरा जीन जब ब्वाल कि भारत से जब तलक गरीबी नि हटली तब तक इंदिरा जीन चैन नि लीण। फिर इंदिरा जीन बतायी कि भारत क विकास मध्य तीन प्रमुख शत्रु खड़ छन फ्लो विपक्षी दल , दुसर 'विदेशी हाथ 'अर तिसर हिंदूवादी शक्तियां विशेषकर आरएसएस। यूं द्वी शत्रुओं पर इंदिरा जीन समय ले। अंत म बि इंदिरा जीन गरीबी हटनी ही चाहिए व मै चैन से नहीं बैठूंगी दुहरायी।
हम सब गरीबी हटण क इच्छाधारी प्रसन्न छा कि इंदिरा जी तो गरीबी हटाओ म दिन रात खपेणी च किन्तु विपक्षी दल , अर आरएसएस पर बड़ो क्रोध आयी कि यी गरीबी नि हटण दीणा छन। हां 'विदेशी हाथ ' को च पर हमन इना उना पता लगाई तो क्वी बुलणु छौ मौउ उस्त तुंग होलु , कैक सलाह छे ह्वे सकद च सी आई ए विदेशी हाथ हो कुछ न बताई कि केजीबी ही विदेशी हाथ च। आरएसएस पर क्रोध आयी तो हमन जनसंघी नेता नित्त्या नंद स्वामी तै खूब गाळी देन कि यी लोग गरीबी हटाण म वाधा डाळणा छन।
यांक उपरान्त चुनाव ऐ गेन। हम तीन चार छात्रों तै बड़ो दुःख ह्वे कि हम चुनाव म वोट दीण लैक नि हुंवां। हम लज्जाणा छा कि हम इंदिरा जीक दगड़ 'गरीबी हटाण' म साथ नि दीणा छां। फिर मि तै पता चल कि हमर चार रिस्तेदार जौंक ट्रांसफर ह्वे गे छा का तौंक चुनावी कार्ड च। हमर रिस्तेदार न जु गरीबी हटाणो आतुर छा तौन मेकुण ब्वाल कि अपर तीन दगड्यो तै बोगस वोट दीणा आ। चुनाव क दिन हम तीन दोस्त कारगी गाँव से चुक्खू वाला अयां अर दुसराक नाम से गरीबी हटाणो उद्देश्य से शराब फैक्ट्री स्वामी बी बी शरण तै वोट देक ऐ गेवां। हमन समज हमन गरीबी हटाणो जंग जीत आल। यु छौ हमर समाजवाद हेतु त्याग।
धीरे धीरे चुनावों से लगाव कम ह्वे पर 'गरीबी हटाओ ' से लगाव कम नि ह्वे। तब भि प्रत्येक दिन समाचार पत्र इलै दिखदा छा कि इंदिरा जी क्वी योजना लायी कि ना। मि मुंबई ऐ गे छौ। प्राइवेट कम्पनी म नौकरी लग गे अर मुंबई ऐक पता चौल कि प्राइवेट कम्पनी से नौकरी मिलदी तो प्राइवेट उद्यम शोषक ना अपितु पोषक छन भारत हेतु।
२५ जून कुण मुंबई म मि सेल्स कार्य हेतु चर्चगेट ग्यों अर तब मिड डे म समाचार पौढ़ कि इंदिरा जीन अपर प्रधान मंत्री पद बचाणो हेतु आपात काल लगाई दे। एक सम्मान को कांच टूट गे। सेल्स टूर पर जाण से पता चल कि म्यार तीन डीलर्स बि आपात काल म कैद करे गेन। जु सम्मान , इज्जत इंदिरा जी की छे वो बिलकुल समाप्त ह्वे गे अपितु धीरे धीरे आपात काल की कथा सूणि इंदिरा जी व कॉंग्रेस से घृणा शुरू ह्वे गे।
भौत सा राजनैतिक विशेषज्ञ कॉंग्रेस क पतन राजीव काल से दिखदन किंतु मेरी समज से आपातकाल ही कॉंग्रेस पतन की पैली फैड़ी छे।

Copyright @ Bhishma Kukreti, 2024

लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
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