भवन संख्या - 767
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कोलिंडा ( थलीसैण , पौड़ी गढ़वाल ) के जुयाल भवन की काष्ठ कला , अलंकरण , उत्कीर्णन
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Traditional House Wood Art and Carving Art in House of, Kolinda , Thalisain , Pauri Garhwal
उत्तराखंड के भवनों में में काष्ठ कला , अलंकरण , उत्कीर्णन श्रृंखला - संख्या - 767
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संकलन - भीष्म कुकरेती
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गाँव, ब्लॉक , जनपद -कोलिंडा , थलीसैण , पौड़ी गढ़वाल
स्वामित्व -जगदीश चंद्र जुयाल
भवन का प्रकार अर्थात पुर (Floor) व खंड - दुपुर , दुखंड
भवन में काष्ठ कला समीक्षा हेतु मुख्य अंग - खोली , तिबारी , अन्य भाग
भवन अपने समय का प्रसिद्ध व laindmark भवन था वर्तमान में भी।
खोलीकला विवरण
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -स्तम्भ युग्म में
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ बेलबोटों के अंकन संग ऊपर बढ़ शीर्ष (मुरिन्ड /मथिण्ड ) को मिलता है।
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मुरिन्ड /मथिण्ड शीर्ष में देव मूर्ति स्थिति - बाह्य देव मूर्ति
----तिबारी काष्ठ कला ----
तिबारी का तल floor - प्रथम
स्तम्भ (सिंगाड़ ) संख्या -चार
स्तम्भ कला -
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ लौकी आकर लेता है व ऊपर बढ़ता है , जहाँ हीनतम गोलाई है वहां से अधोगामी पद्म पुष्प से घट , इसके ऊपर ड्यूल से से घुंडी व ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल उत्कीर्णन से घट निर्माण होता है।
स्तम्भ में रिज व डिप्रेसन (उठाव -गहराई) भी है
थांत में कला -सपाट
निष्कर्ष- अपने समय का आकर्षक भवन। ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय (देव मूर्ति) अलंकरण
सूचना व फोटो आभार : विष्णु सुखदेव नेगी
प्रस्तुत विवरण केवल काष्ठ कला हेतु है इसमें स्वामित्व का कोई महत्व न्यायिक स्वामित्व हेतु नहीं है। सूचनाएं श्रुति माध्यम से मिली हैं अतः स्थान व स्वामित्व में अंतर् हो सकता है
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