Bhishma Kukreti, 

भवन संख्या - 766
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गणाई गंगोली (पिथौरागढ़ ) के एक भवन में काष्ठ कला, अलंकरण , उत्कीर्ण
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Traditional House Wood Carving Art of Ganai Gangoli Pithoragarh , Kumaun
उत्तराखंड के भवनों (बाखली , जंगला , छाजों , खोली ) में काष्ठ कला, अलंकरण , उत्कीर्ण -766
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संकलन - भीष्म कुकरेती
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गाँव , जनपद -गणाई गंगोली , पिथौरागढ़
भवन प्रकार - तिपुर , दुपुर
भवन में काष्ठ कला हेतु मुख्य अंग - खोली , कई छाज म बौळी/बली (शहतीर )
भवन के भूतल में दो दान (भंडार या गौशाला )के द्वार हैं। दोनों दान ऊपर काष्ठ बली या शहतीर हैं जिनके ऊपर छाज ठीके हैं।
बली /बौळी में काष्ठ अंकन - बौळी /बली का बाह्य भाग सपाट लगता है किन्तु मध्य मे आयत है जिसके अंदर लता या //// नुमा आकृतियां अंकित हुयी हैं।
खोली -
भूतल से खोली शुरू होकर प्रथम तल तक खोली है।
खोली के स्तम्भ कला -
खोली के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
स्तम्भ युग्म में हैं बाह्य दो स्तम्भ अंदर के स्तम्भ में कमल दल की घुंडियां हैं जबकि मध्य स्तम्भ में जंजीर या लताओं का अंकन लगता है.
दोनों कमल दल वाले स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ लतनुमा अंकन के साथ ऊपर बढ़ते हैं व ऊपर खोली के मुरिन्ड /मथिण्ड /शीर्ष /head की सतह बन जाते हैं।
खोली में तोरणम की कला - अंकन हुआ होगा किन्तु अब समय के साथ अंकन मिट सा गया है , स्कंध में अंकन के लक्षण हैं।
खोली शीर्ष में काष्ठ कला - जो स्तम्भों के ऊपरी भाग थे। शीर्ष में कोई शगुन चिन्ह बंधा है।
खोली ऊपर छपरिका या छत के आधार में यदि काष्ठ कला विद्यमान है - छपरिका के आधार नीचे दास हैं व उनके नीचे छह आयत हैं जिनमे चतुर्भुज/षट्भुज देव मूर्ति अंकन हुआ है।
छाज संख्या -५
छाज के स्तम्भों में काष्ठ कला -सभी युग्म में हैं।
छाजों के सिंगाड़ / स्तम्भों में कला -
प्रत्येक छाज के स्तम्भ युग्म में हैं , मध्य के स्तम्भ विशेष बन जाते हैं।
स्तम्भ के आधार में अधोगामी पद्म पुष्प दल का उत्कीर्णन हुआ है जो घट नितमित करता है जिसके ऊपर चूड़ी या ड्यूल अंकन है जिसके ऊपर उर्घ्वगामी पद्म पुष्प दल के अंकन से घट निर्मित हुआ है। यहाँ से स्तम्भ अलग अलग रूप में ऊपर बढ़ते हैं व छाज के शीर्ष सतह बन जाते हैं। प्रत्येक छाज के स्तम्भ की कला यहाँ से विशेष /exclusive है। एक में सपाट , एक में धनुष के छोर जैसे , एक में पत्ते में अंकन , दीखते हैं।
प्रत्येक छाज के प्रत्येक स्तम्भ अंकन महीन व आकरहक हैं
छाज के तोरणम की काष्ठ कला - लगभग खोली के तोरणम जैसे ही
छाज के निम्न तल के ढक्क्नों में कला - प्रथम तल के छाजों के ढक्क्नों के निम्न तल सपाट हैं।
जबकि द्वितीय तल के छाजों के निम्न ढक्क्नों में विशेष वानस्पतिक (पत्तियां ) आकर्षक महीन अंकन पाया गया है। एक स्थल पर पीपल पत्ती भी लगती है।
छाज के उपरी ओर के ढक्क्नों कला-- अधिकतर सपाट
निष्कर्ष --- भवन सुडौल , चिनाई शक्तिशाली , काष्ठ कला आकर्षक , ज्यामितीय , प्राकृतिक व मानवीय अलंकरण। उत्कृष्ट कला अंकन।
सूचना व फोटो आभार : जानकी उप्रेती
प्रस्तुत आलेख काष्ठ कला पर केंद्रित है ना कि स्वामित्व पर। स्वामित्व या भागीदारों के नाम में अंतर् हो सकता है।


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