डी। डी. सुंदरियाल: विभिन्न विषयों और चित्रों के गढ़वाली कवि By: Bhishma Kukreti


Bhishma Kukreti
- डी। डी. सुंदरियाल: विभिन्न विषयों और चित्रों के गढ़वाली कवि - भीष्म कुकरेती - डी। डी. सुंदरियाल: विभिन्न विषयों और चित्रों के गढ़वाली कवि एक गढ़वाली कवि और नाटककार D. डी सुंदरियाल का जन्म 1950 में पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड और दक्षिण एशिया के किमगढ के कुई गांव में हुआ था। वे अपनी कविताएं इधर उधर प्रकाशित करते रहे और 2015 में उन्होंने अपना गढ़वाली काव्य संग्रह प्रकाशित किया। सुन्दरियाल गढ़वाली कविता तीन शैलियों में गीत कविताएं गज़ल पारंपरिक कविताएं दीन दयाल सुंदरियाल की गढ़वाली कविता के विषय गाँव की छवि, पलायन, भ्रष्टाचार, पलायन और बदलती सामाजिक शैली से भिन्न हैं। वह गढवाल के प्रतीकों का प्रयोग करके कविता का वर्णन और आवश्यक छवि बनाते हैं उन्होंने दो कविता संग्रह प्रकाशित किए अर ब्वे श्रीका कविता - तुम लिखदा रैग्यों पहाड़ै जनानी कथा तुम रैग्यों नाउ छपाण पर तुम रैग्यों पैसा कमाण पर कबि जाण छ वीं जनानी s व्यथा।

सर्वाधिकार @ भीष्म कुकरेती
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