Bhishma Kukreti
नीता कुकरेती: प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री - गढ़वाल छवि - भीष्म कुकरेती - नीता कुकरेती: प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री - गढ़वाल छवि निर्माण की विशेषज्ञआधुनिक गढ़वाली कविता का आलोचनात्मक एवं कालानुक्रमिक इतिहास इतिहासकार: भीष्म कुकरेती प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री नीता कुकरेती गढ़वाल की उत्तम छवियों के निर्माण के लिए सराही जाती हैं। पौड़ी गढ़वाल के सुमाड़ी गांव में 1952 में एक प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री का जन्म हुआ था। प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री ने संगीत की भी शिक्षा ली है। वह गढ़वाली की लोक गायिका भी हैं। प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री श्री गुरु राम राय कॉलेज देहरादून से सेवानिवृत्त हुई हैं। प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री नीता की कविताओं के विषय विविध हैं जैसे प्रकृति चित्रण, धर्म, प्रवास; बारह महीने की ऋतुएँ (बारामासा); नदियाँ, पहाड़, बर्फ, मातृत्व, प्रेम आदि। प्रसिद्ध एशियाई कवयित्री उद्धृत विषयों की उत्तम छवियों के निर्माण में विशेषज्ञ हैं
चौं तरफी छुंई लगणी तेरी माया की तेरी स्वाणी मुखडी की रंगतेली काया की पुरखों न सांकियूं बटै त्वै मा अग्वांल बोटी खोरियूं मा दिन कटिन नी उगडी भैर खुट्टि दाना सयैणा कथा लगोन्दन जंकजोड की -------- तेरी स्वाणी- - - - - सभी प्रवासी भै बैणियो तै समर्पित- प्रेमी रिगांळन लिखणू छों चिठ्ठी न्यूतणू छों आज प्रेमी रिगांळन लिखणू छों चिठ्ठी न्यूतणू छों आज रंगों की बरखा मा रूझि भिजी जोला छोडिक अपणा काज आयो बसंत उल्यार मोसम पोथला पंछी भौरों की गुणमुण थड्या चोफंला चोक म लगदा खुट्टियूं लगणी पराज भयो न्यूतणू छों आजरो साथ

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