तैमूर द्वारा उदयपुर म जघन्य मानव हत्त्या व सैकड़ों मंदिर ध्वस्त करण

नीलकंठ (उदयपुर, उत्तराखंड ) मंदिर म पुरण ग्रंथ कख हरचेन
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कथा - भीष्म कुकरेती

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१२ वर्षीय मनोज भट्ट न कुछ कुछ रोष म अपर अध्यापक प्रेम सिंह पयाल जी कुण ब्वाल - मासाब आप कबि कबि झूठ किलै बुल्दां ।
हृदयराम अध्यापक पढ़ाकू मनोज से प्रेम करदन। तो भरी कक्षा म सब छात्रों समिण प्रिय शिष्य क आक्षेप से क्रोधित तो ह्वेन किंतु क्रोध तैं लुकान्द लुकान्द ठंडो स्वभाव दर्शायी अर पूछ - बेटा मि तो त याद नी कि मीन ते से झूठ नि बोली हो।
मनोज न रुंवासा ह्वेक ब्वाल - मि ब्याळि नीलकंठ अर भुवनेश्वरी मंदिर गे छौ। तख जु आप न पढ़ाई सि कुछ बि नि देख।
अध्यापक जीन पूछ - मीन क्या बताई छौ जु नीलकंठ या भुवनेश्वरी मंदिर म नि दिखे ?
निरयत्सः म मनोज भट्ट न उत्तर दे - मासाब ! मंदिर पुरण नि छन अर मीन पुजारियों तै पूछ तो पायी कि मंदिरों म क्वी बि ग्रंथ नी च।
इन सूण कि पयाल जी क आँखों से अंसदरी बगण मिसे गेन। अर बुलण लगिन - नीलकंठ या भुवनेश्वरी क इ मंदिर क्या यमकेश्वर , मअब गढ़ क क्वी बि मंदिर अपर वास्तविक अवस्था म नि मिल्दन इख तख कि हरिद्वार , ऋषिकेश म बि प्राचीन मंदिर पुरण अवस्था म क्वी नी च सब पुनर्जीवित करे गेन। इख एक कि दक्ष मंदिर बि नयो ही च।
छात्र पयाल जीक आंसू देखि क रंगते गेन। मनोज भट्ट तो अफु तैं अपराधी अनुभव करण मिसे गे।
लगभग १४ वीं सदी म एक क्रूर , जन्मजात , धर्मांध , दुर्दांत , निर्दयी ,हत्त्यारा , मानव् क नाम पर कंलक ल्वार पैदा ह्वे किँतु तैन सैकड़ा निरीह मानवों की हत्त्या कौरि समरकंद की मंगोल गद्दी पर अधिकार कार। हत्त्या इन नृशंस प्रकार से करे गेन कि पूरा समरकंद इ ना आस पास का देशों म बि इन भय पैदा कार कि कई सदियों तक इन नृशंस हत्त्या क नाम लीण म इ लोग भयभीत ह्वे जांद छा। आज बि तैमूर लंगड़ा नाम कज्किस्तान भारत म लिए जाय तो लोगों भय म मूत्र निकळ जांद।
तै दुर्दांत , मानव हन्ता , क्रूर हत्त्यारा लंगड़ा पर सिकंदर जन 'पृथ्वी जीतो ' क भूत चढ़ गे। जनकि सामान्य मुस्लिम राजाओं क संस्कृति छे तनि रणनीति तैमूर डूंडा न बि अपनायी अर्थात रक्त बजाओ ना कि मनुष्यों क अपितु गौर , बछड़ों क बि और घोर भी उतपति हेतु खेतों क उपज जळा दिए जाय। गैर मुस्लिमों क पूजा स्थलों तै तुड़े जाय व भ्रस्ट करे जाय। जख तैमूर डूंडा क सेना जांदी छे भूमि लाल ह्वे जांद छे , पशु विहीन ह्वे जांद छे अर सर्वत्र आग ही अग्यो ही अग्यो , डूंडा क सेना द्वारा अनाज भंडार बि जळआये जांद छा। डूंडा शक्तिशाली मानवों तै बंदी बणैक अपर दगड़ समरकंद म सेवक बणानो हेतु इन बांधिक लीजांदा छा जन पशु। गाय भैंस बि पकड़िक समरकंद हेतु लिये जांद छा। धर्मस्थलों अर व्यक्तिगत धन , सोना चांदी व धातु भांड लुटण तो भी प्रसारण को एक प्रमुख अंग छौ तैमूर डूंडा का। जब वैन भारत पर आक्रमण शुरू कार तो तै मानव विरोधी मुस्लिम राजा न एक नई विधि अपनायी। जब बि के गाँव म घुस तो हिन्दुओं क मुख पर गाय क मांश घुसाी दिए जांद छौ कि हिन्दू जनता क आत्मभिमान समाप्त ह्वे जावो अर या बात दूर दूर तक प्रसारित ह्वे जाव कि तैमूर डूंडा निर्दयी , मानवघाटी मुस्लिम आक्रमणकारी च। शैतान का दुसर रूप ना स्वयं शैतान छौ तैमूर डूंडा।
मनुष्य सभ्यता विरोधी मुस्लिम शासक तैमूर डूंडा न १३९८ म भारत पर आक्रमण शुरू कार। क्रूरता क प्रतीक लगों तै मारदा मारदा दिल्ली पॉंच किन्तु दिल्ली क शासक तैमूर डूंडा क भयानकता
दिल्ली म जब हत्तीरा मुस्लिम डूंडा क पास एक लाख हिंदी कैद छा तो यूं तै अगनै लिजाण कठिन चाउ तो दिल्ली म एक लाख हिन्दू कटे गेन। आश्चर्य या च मुस्लिम शासक , आक्रमणकारी द्वारा इन जघन्य सामूहिक हत्त्या उपरान्त बि हिन्दुओं न अहिंसा नि छोड़ी हिन्दू इथगा लुंज , वीर्यविहीन ह्वे गे छा।
इनि प्रतिदिन सैकड़ों हिन्दुओं तै मौत का घात उतारद उतारद क्रूरों म क्रूर हत्त्यारा मुस्लिम शासक तैमूर हरिद्वार पौंच। हरिद्वार म क्रूरतम , मानव हन्ता , मानव विरोधी मुस्लिम शासक तैमूर का सैनिकों व जबरदस्ती गोर हडक मुख पर डाळी बणयां नया नया मुसलमान सैनिकों न हरिद्वार म नाश , अधपतन क परिकाष्ठा रच। एक बि प्राचीन लघु या महा मंदिर नि छुड़े गे। मंदिर क धन लुटे गे अर सनातन धर्म , बौद्ध -जैन धर्म क जो ग्रंथ मंदिरों व व्यक्तिगत रूप से पंडितों म छा सि जळये गेन। अर तुड्यां मंदिरों मलवा म गोरु मांश , रुधिर फेंक दे कि हिन्दुओं क आत्मसम्मान ही सफाचट ह्वे जाओ ।
लाखांदल क शासक रतनसेन न तैमूर तै रुकणों प्रयत्न कार किन्तु असफल राई। ,मदिर तोड़दी , रक्तपात करदी कत्ले आम करदा करदा चंडीघाट पार कार अर सलाण क धरती म ऐ गे। युद्ध ह्वे सलाण राजा बछराज अर वैक सिनपति शेखर न कई प्रयत्न करिन। किन्तु दुर्दांत जन्मजात क्रूर मुस्लिम सेना न शेखर क निर्मम बोटी बोटी काटिक हत्त्या इ नि कार अपितु हिन्दू सेना तैं दिखैक दिखैक हत्त्या कार। हिन्दू हत्त्या म सबसे बिंडी भागीदार तैमूर का समरकंदी सेना कम छे अधिक भागीदार तो नया न्य मुस्लिम बण्या सैनिक छा तोँ तै सेना व मुस्लिम समाज म बड़ पद की ल्हालसा छे तो हिन्दू निबटाण म अधिक कार्यशील छा इख तक कि बड़ मुसलमान दिखाणो खातिर सि नया नया बण्यां मुसलमान सेना गौड़ -बछर -भैंस हिन्दुओं समिण इन कटदा छा कि समरकंदी क्रूर मुस्लिम सैनिक बि लज्जा जांद छा।
अब जब सलाण राजा बछराज की सेना चंडीघाट म हार गे तो उत्साह म आतंकवादी मुस्लिम डूंडा तैमूर न अपर सेना तै श्रीनगर की ओर अभियान की आज्ञा दे। क्रूर, मानवशात्रु मुस्लिम शासक आतंकवादी तैमूर डूडा तै सूचना मिल छे कि केदारखंड क राजा क पास तामा , लोहा अर सोना की खान छन। यद्यपि डूंडा तैमूर की सेना तै उत्तराखंड जन पहाड़ी क्षेत्र म अभियान क अनुभव कम छौ किन्तु सोना, लोहा अर तामा खांड्यूं से लोहा, तामा सोना प्राप्ति क बिगरौ , निरदयु मानवघाटी मुस्लिम शासक डूंडा क सेना स्वर्गाश्रम क चौरस म पॉंच। तखम मानव हन्ता मुस्लिम शासक डूंडा तैमूर न अपर सलाहकारों दगड़ गणत कार तो केदारखंड (गढ़वाल ) अभियान हेतु भोजन की अति आवश्यकता होली। घृणित डूंडा तै सूचना मिल छे कि अगनै नदी म बाढ़ आईं छे तो स्वर्गाश्रम से ही तैन आज्ञा दे कि आस पास का क्षेत्र म फ़ैल जाओ अर अनाज कट्ठा कारो दगड़म तैमूरी त्रास फैलाओ अर्थात मनुष्यों की हत्त्या , गौर भैंस पकड़ो निथर हिन्दुओं क समिण गोर भैंस काटो , मंदिरों क धन लूटो अर हिन्दू प्रतीकों तै गळाये जाय। जख जख ग्रंथ होवन तौं ग्रंथों तै भष्माभूत करे जाय।
जनकि आज बि सामान्य हिन्दू राजा , हिन्दू पुजारियों म मुस्लिम आक्रन्ता या लव जिहाद जन आक्रमण रोकणो मंत्रणा नि हूंदी कारण हिन्दुओं म अहम भौत बुर हूंद। नाक बड़ी किन्तु सक्यात कुछ ना। तो ढांगगढ़ क थोकदार अर मणिकपुर क थोकदार म तैमूर डूंडा की आंधी रुकणो हेतु रणनीति पर सलाह -मंत्रणा ह्वै इ नी। जबकि द्वी साडू भै छा. जब तैमूर डूंडा की सेना अचाणचक मणिकपुर जीना घुस तो रिख्यड -बणचुरी , भृगुखाल तक पौंच गेन दुर्दांत यमराज जन डूंडा की सेना। तो मणिक क्षेत्र क थोकदार ढांगगढ़ क थोकदार म चल गे।
तौं मुस्लिम सैनिकों न तैमूरी कार्य कार। सरा उदयपुर म गाँव गाँव क अनाज , गोर लुटे गेन। एक एक मनुष्य की हत्त्या करे गे क्या बुड्या -क्या बच्चा। उदयपुर की धरती मानव रक्त से लाल चचकार ह्वे गे। खेती म जो फसल छे तख सुखो घास डाळि आग लगैक कृषि उपज समाप्त करे गे। घर -झोपड़ी जळाये गेन। भौत सा गाँव वळ डरन बौण गेन तो तैमूरी बहसि सेना न बौण का बौण जळायी देन। मृत्यु व आग को ही तांडव छौ पूरो उदयपुर पट्टी म। हिन्दू सेना धर्म युद्ध क आदि छे तो इन अधर्मी -प्रजा विरोधी , आतंकी युद्ध शैली हिन्दुओं तै आंद नि छौ तो डूंडा तैमूर की सेना समिण हरण क्या मरण इ छौ।
स्वर्गाश्रम क निकट नीलकंठ , भुवनेश्वरी जन सब छुट महा मंदिर , रिख्यड -बणचुरी म प्राचीन देवी मंदिर , भृगुखाल म प्राचीन ग्रंथालय तोड़े गेन तौंक मलवा तक गड़ये गे। पंडितों क इख जो भी प्राचीन साहित्य छौ सि शोध कौरी कौरी जळये गे। ग्रंथ प्राचीन काकद या भोजपत्रों म अंकित छा। उदयपुर की धरती से ग्रंथ जखम विज्ञान , दर्शन , ज्योतिष , तारामंडल , भूगोल , तीर्थ , नीति शास्त्र , धर्म शास्त्र , काम शास्त्र , भोजन शास्त्र , आयुर्विज्ञान , तर्क शास्त्र , बौद्ध शास्त्र , तंत्र मंत्र , वेदों क नकल आदि ज्ञान छौ सब भष्मी भूत ह्वे गे। रक्त युक्त धरती , मानव रहित धरती रै गे। संभवतया दस बीस वर्ष लग होला धरती म मानव सभ्यता जमण म।
अध्यापक पयाल जीन उपसंहार करदो ब्वाल - मनोज ! यो ही कारण च तीन उदयपुर क्या दक्षिण गढ़वाल म कखि बि प्राचीन मंदिर , प्राचीन ग्रंथालय नि देखीं अर तख क्वी प्राचीन तत्त्व कुछ नि देख।
सबछात्र -छात्रा अपर पुरखों क बुरा हाल इतिहास सूणी आंसू इ बगै सकदा छा।
मनोज भट्ट न रूंद रूंद पूछ - तो आतंकवादी मुस्लिम डूडा नागपुर तामाखांड्यूं तक पौंछ गे छौ ?
पयाल जीन उत्तर दे - ना इतिहास साक्षी च जब जब हिन्दू राजा या हिन्दू नेता एक ह्वेन तो सदा ही आतंकवादी मुस्लिम तै हरण ही पोड़। , ढांगगढ़ थोकदार अर मणिक पुर क थोकदार एक ह्वेन अर रणनीति क अंतर्गत डूंडा तैमूर की आतंकवादी मुस्लिम सेना तै मथि बिटेन चल्ली , पत्थरों से मार मार कोरी भगायी अर मुस्लिम आतंकवादियों तै हिमाचल ह्वेक समरकंद भगण पौड़।
सब छात्र - औ तो आतंकवादी मुस्लिमों न हमर ज्ञान ग्रंथ जळऐ देन अर मंदिरों क शिलालेखों तै ध्वस्त कर देन तो हमहिन्दुओं क क्वी बि प्राचीनता कखि बि नि मिलदी।
अध्यापक पयाल जीन हामी भौर।
पयाल जीन अंत म ब्वाल - नीलकंठ , यमकेश्वर , भृगुखाल , रिख्यड -बणचुरी क जो भी मंदिर छन सी अब्याक ही पुनर्निर्मित छन तभी तो एक बि पटाळ व शैली पुरण नि मिलदी हमर क्षेत्र क मंदिरों म। जख जख लोक कथा छन कि मूर्ति स्वंभू ह्वेक मथि आयी वो मंदिर आतंकवादी मुस्लिमों द्वारा भूमिगत करे गे छौ।

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लिखवार कथा क सत्यता पर क्वी उत्तरदायित्व नि लींदो

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